डूंगरी मेला (Dhungri Mela) क्या है? जानिए डूंगरी मेले से जुड़ी सारी बातें

Dhungri Mela डुंगरी मेला हिमाचल के मनाली में मनाया जाने वाला तीन दिवसीय उत्सव है। यह मेला मनाली व् उसके आस पास के गावों में देवी हडिम्बा के जन्मोत्सव पर मनाया जाता है। इसमें 13 मई से लेकर 16 मई तक वार्षिक मेला लगता है।

देवी हडिंबा भीम की पत्नी और पौराणिक कथाओं के अनुसार वह एक राक्षसी थी। जो अन्य राक्षसों के साथ डूंगरी जंगल में रहती थी। जब पांडवों को अज्ञातवास मिला था तब वो यहां कुछ दिन के लिए ठहरने आए थे। जैसे ही राक्षसों ने उन्हें देखा तो उन्हें अपना भोजन बनाने की योजना बनाई। लेकिन उन में से एक राक्षशी हडिंबा भीम पर अत्यधिक मोहित हो गई। हडिंबा के भाईयों ने भीम पर आक्रमण किया लेकिन उस से जीत नहीं पाए और अंत में हडिंबा और भीम का विवाह हुआ। उन दोनों को एक संतान की प्राप्ति हुई जिसका नाम घटोत्कच रखा गया।

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अज्ञातवास खत्म होने के बाद पांडवों को वापस जाना था लेक़िन हडिंबा ने जंगल न छोड़ने का निर्णय लिया। तब से ऐसा माना जाता है देवी हडिंबा जंगल और पहाड़ों की तरफ आने वाले लोगों की रक्षा करती है। तभी से लोग उसे एक देवी के रूप में पूजने लगे। Dhungri Mela को हडिंबा मंदिर फेस्टिवल के नाम से भी जाना जाता है।

आप को इस मेले में मनाली की अनोखी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके साथ ही आप यहां जायकेदार खानपान के भी मज़े ले सकते हैं। यहां के आस पास के सभी गांव के अलग-अलग देवी-देवता होते हैं जिन्हें मेला लगने पर अच्छे से सजाया जाता है। सभी देवी देवताओं को अच्छे से सजा-धजाकर रथयात्रा निकाली जाती है।

इस तीन दिवसीय उत्सव में मनाली का नज़ारा बहुत ही खूबसूरत और देखने लायक होता है। लोग इन तीन दिनों में देवी-देवताओं का जुलूस निकालते हैं और यहां के रहने वाले सभी लोग एक खास तरह का नृत्य प्रस्तुत करते हैं। इस त्यौहार में एक खास तरह का इंस्ट्रूमेंट भी इस्तेमाल होता है जिसे करनाल कहते है। उसे यहां इस मेले में बजाने की ख़ास परंपरा है। अगर आप इस समय मनाली आते हैं तो आप यहां के लोकनृत्य और लोकगीत को एन्जॉय कर सकते हैं।

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