Vishnu Bhagwan: तो इसलिए लिया था भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार

Vishnu Bhagwan: जब जब संसार पर कोई विशेष आपदा आती है तब तब Vishnu Bhagwan को अवतरित होना पड़ता है। Vishnu Bhagwan ने हर युग में प्राणियों का उद्धार करने के लिए अवतार लिया है। कभी राम तो कभी कृष्ण उन्होंने न जाने कितने ही अवतार लिए। ऐसा ही एक अवतार Vishnu Bhagwan ने लिया जिसे मत्स्य अवतार कहा जाता है। भगवान का ये अवतार उनके दस अवतारों में से एक है।

अब इस अवतार लेने के पीछे दो मत जुड़े हैं। पहला ये है कि उन्होंने लोगों को प्रलय से बचाने के लिए अवतार लिया था और दूसरा ये कि एक बार एक राक्षस ने वेदों को चुरा लिया। इसके बाद उस राक्षस ने वेदों को समुन्द्र की गहराई में छुपा दिया। उन वेदों को प्राप्त करने के लिए भगवान् ने मत्स्य अवतार लिया था।

हमारे प्रसिद्ध शास्त्र श्रीमद्भगवदगीता गीता में लिखी कहानी जो बहुत प्रचलित है। उसमें Vishnu Bhagwan के इस मत्स्य अवतार के बारें में कहा गया है कि एक बार सत्यव्रत नाम के राजा हुआ करते थे। एक दिन वो कृतमाला नदी में तर्पण के लिए गए। जब वो तर्पण कर रहे थे तो उनके हाथों में एक छोटी सी मछली आ गई।

सत्यव्रत ने मछली कि मदद के लिए जैसे ही उसे नदी में डाला तो मछली ने कहा कि राजा आप कृपया ऐसा न करें। मुझे नदी में वापस न भेजें अन्यथा जल के बड़े जीव-जंतु मुझे खा जाएंगे। इतना सुनते ही राजा ने मछली को फिर दोबारा जल से बाहर निकाल लिया। मछली को अपने कमंडल में रख वो उसे अपने आश्रम ले गए।

रात बीती ही थी कि तड़के उन्होंने देखा कि मछली का आकार बढ़ गया है। तब राजा ने उसे कमंडल से निकालकर किसी बड़े मटके में डाल दिया। अब मटके में भी मछली का आकार बढ़ गया तो राजा ने उसे तालाब में डाल दिया। लेकिन राजा एक बात तो समझ गए थे कि ये कोई साधारण मछली नहीं है।

अब मछली के आकार को देखते हुए उन्होंने उसे समुद्र में डालने की सोची। राजा ने मछली को समुद्र में डालना चाहा तो मछली फिर बोल पड़ी कि समुद्र में बड़े मगरमच्छ हैं, मुझे वहां मत छोड़िए। राजा इस बात से चिंतित थे और जानने के इच्छुक भी कि आखिर बात क्या है। तब राजा ने हाथ जोड़ते हुए मछली से पूछा कि आप कोई मामूली मछली नहीं जान पड़ती जिस तरीके से आपका आकार अप्रत्याशित तेजी से बढ़ रहा है। कृपया बताएं कि आप कौन हैं?

उसी क्षण Vishnu Bhagwan अपने मत्स्य अवतार के साथ प्रकट हुए। उन्होंने राजा से कहा कि आज से ठीक 7वें दिन प्रलय के कारण पूरी पृथ्वी समुद्र में डूब जाएगी। राजा तुम एक नौका तैयार करो जैसे ही प्रलय आए, तुम सप्त ऋषियों सहित सभी प्राणियों को लेकर उस नौका में सवार हो जाना। प्राणियों के साथ-साथ सभी अनाज और छोटे बड़े बीज भी उसी में रख लेना। तेज आंधी से नौका डगमाएगी जरूर। लेकिन बिना घबराए तुम्हें मेरे सींग में नाव कि रस्सी बांधनी होगी। मैं नाव को समुद्र में खींचता रहूंगा। तुम उस समय तुम मुझ से इस प्रश्न का उत्तर माँगना। इतना कहते ही मछली गायब हो गई।

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आखिर वो दिन आ ही गया जैसा मछली ने कहा था वो सब सच निकला। अब राजा ने ठीक वैसा ही किया जैसा उसे मछली ने करने को कहा था। वो ऋषियों, अन्न और बीजों को लेकर नौका में बैठ गए। बस फिर भगवानरूपी वो मछली दिखाई दी। राजा ने नाव को मछली के सींगो से बांध दिया और सभी जीवों को बचाने की स्तुति करने लगे। भगवान ने राजा को आत्मतत्व का उपदेश दिया और अंत में मछलीरूपी Vishnu Bhagwan ने नौका को हिमालय की चोटी से बांध दिया। अब तक प्रलय रुक चुकी थी और भगवान ने फिर से पृथ्वी पर जीवन शुरू किया। अंत में राजा सूर्य के पुत्र श्राद्धदेव के नाम से जाने गए, जिन्हें लोग आज मनु के नाम से जानते हैं।

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