Kedarnath Temple History in Hindi: बाढ़ भी जिसकी नींव न हिला सकी

Kedarnath Temple History in Hindi: उत्तराखण्ड में हिमालय पर्वत की गोद में 3593 फीट की ऊंचाई पर बना एक सुंदर मंदिर है, जिसे केदारनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है। यह भव्य मंदिर बारह ज्योतिर्लिंग और चार धाम की यात्रा में से एक है। इस मंदिर का निर्माण सन 1076 – 1099 ई० के दौरान ग्वालियर के राजा भोज ने करवाया था। वैज्ञानिक हमेशा ही कुछ रहस्यपूर्ण खोदने में दिलचस्प रहे हैं। वो जब तक बात की जड़ तक न जाए तब तक शांत नहीं बैठते। इसलिए इस मंदिर के जुड़े रहस्य को जानने के लिए देहरादून की रिसर्च टीम मंदिर की दीवारों पर कुछ शोध करने लगी।

जिससे उन्हें यह पता चला की यह मंदिर 400 वर्षों तक बर्फ की चादर से ढ़का हुआ था। मंदिर की बाहरी दीवारों पर विभिन्न परीक्षणों किए गए, जिस से यह साफ़ जाहिर होता था कि मंदिर वाकई बर्फ में दफना हुआ था। इस मंदिर पर पीले रंग की रेखाएँ पाई गईं। जिसके बारें में कहा गया है कि ये दरारें बार बार ग्लेशियर के टकराने से बनी है। इन वैज्ञानिकों ने आगे के शोध में दिखाया कि ये रेखाएं एक छोटा हिमयुग (Little Ice Age) का परिणाम थीं। जिसमें यह मंदिर पूरी तरह से बर्फ में ढ़क गया। आश्चर्यजनक बात तो यह थी कि इतने सालों बाद भी मंदिर पूरी तरह से ठीक था।

Kedarnath Temple की हिंदू पौराणिक कथा

केदारनाथ धाम के निर्माण की कहानी के पीछे यह कहा गया है कि केदारपर्वत की चोटी पर नर और नारायण ऋषि रहा करते थे। वो निरंतर भगवान शिव की तपस्या करते थे। उन दोनों की पूजा से भगवान शिव बहुत खुश हुए। तब उन्होने नर और नारायण ऋषि को दर्शन दिए और साथ ही यह भी कहा कि वो यहां केदारनाथ ज्योतिर्लिंग में सदैव के लिए वास करेंगें। फिर भला इस मंदिर को कुछ भी कैसे हो सकता है जहाँ भगवान स्वयं निवास करते हो।

Kedarnath Temple में बाढ़ (Kedarnath Temple Flood)

चलिए ये बात तो थी बर्फ की चादर की जिसमें मंदिर 400 सालों तक दबा रहा। लेकिन 2013 में उत्तराखण्ड में आई के बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र केदारनाथ ही था। इस बार मंदिर की दीवारें गिरी भी और बाढ़ में बह भी गई। केदरानाथ धाम के निकट बहुत से होटल थे, दस-दस फीट चौड़ी सड़कें और विश्राम स्थल थेकहा बाढ़ आने से धीरे धीरे सब पानी में बह गए और उस मलबे के नीचे दब गए। अब इनके ऊपर केवल बड़े पत्थर और चट्टानें थी। लेकिन मंदिर का मुख्य हिस्सा और उसका पुराना गुंबद पूरी तरह से सुरक्षित रहे।

kedarnath

भयंकर जल त्रासदी के बाद मंदिर का पुनः निर्माण कार्य शुरू हुआ। और एक बार फिर ये आम यात्रियों के लिए के मन के द्धार खोले गए। अभी हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी दर्शन करने के लिए पहुंचे थे। आज भी लोग यहां निसकोच होकर चार धाम की यात्रा करने पहुंचते हैं। यह लोगों का इस धाम के प्रति अटूट विश्वास और श्रद्धा ही तो है जो भयंकर बाढ़ के बाद भी मंदिर की नींव को न हिला सकी।

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