Kamakhya Mandir Ambubachi Mela 2019: कामाख्या मंदिर के अम्बुबाची मेला क्या है? इससे संबंधित जानकारी के लिए पढ़ें।

Kamakhya Mandir Ambubachi Mela 2019: हर वर्ष जून के महीने में कामाख्या मंदिर में एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। जिसे अम्बुबाची मेला कहते हैं। यह तीन दिनों तक मनाया जाने वाला एक वार्षिक उत्सव है। जो हर साल 22 जून से 24 जून तक कामाख्या मंदिर में मनाया जाता है। हर साल जून के इन्हीं दोनों में हजारो लाखो लोग माता कामाख्या के दर्शन  करने के लिए आते है और उनकी पूजा अर्चना करवाते हैं तथा प्रसाद के रूप में आशीर्वाद लेते हैं।

चलिए आपको थोड़ा विस्तार से समझाते हैं…..

वैसे तो हमारा समाज मासिक धर्म वाली स्त्री को अपवित्र मानता है। महीने के उन  दिनों में उसे किसी भी पवित्र कार्य में शामिल होने की अनुमति नहीं होती और न ही किसी धार्मिक स्थल पर जाने दिया जाता है। लेकिन विडंबना तो देखिए एक तरफ समाज जब स्त्री को अपवित्र  मानता है वहीं दूसरी ओर मासिक धर्म के दौरान कामाख्या देवी को सबसे पवित्र दिन मान कर के पूजा जाता है।

हैरान कर देनी वाली बात यह है कि यहां माता को हर साल जून के महीने में कामाख्या देवी को रजस्वला होती हैं। इतना ही नहीं कहते हैं कि उन दिनों देवी की रजस्वला के कारण पूरी ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है। इन तीन दिनों तक मंदिर के कपाल बंद रहते हैं। मंदिर की गर्भ गुहा में देवी के योनि के आकर का एक पत्थर है। कहते हैं इसी पत्थर से ही रजस्वला होती है। इसलिए इस देवी को बहते रक्त की देवी’ भी कहा जाता है।

Kamakhya

अम्बुबाची मेला हर साल 22 जून को प्रारम्भ होता है और 24 जून तक चलता है। लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि मंदिर में आप तीन दिन तक माता कामाख्या के दर्शन नहीं कर सकते है। इसका कारण है मंदिर के कपाट का तीन दिनों के लिए बंद हो जाना। 24 जून को मंदिर के दरवाजे भक्तों के लिए खोले जाते हैं। भक्त 24 और 25 जून को माता के दर्शन कर सकते हैं। इन्हीं 2 दिनों में आप माँ के दर्शन भी कर सकते हैं और पूजा पाठ भी करवा सकते हैं।

Kamakhya Mandir खुलने और बंद होने का समय

अगर आप पहली बार यह जा रहें है तो जरुरी है, आप यह जान लें कि कामाख्या मंदिर प्रात 5:30 पर खुल जाता है। इसलिए आप सुबह 6 बजे सुबह से लेकर रात के 10 बजे तक दर्शन कर सकते है। यहां इस पूजा के दौरान लोग देश के कोने कोने से आकर पूजा करवाते हैं। यहां पूजा के बाद जानवरों, फलों और सब्जियों की बलि चढाने की भी प्रथा है। अघोरी और तांत्रिक इन दिनों में गुफाओं में साधना करते हैं, तथा अनेक मंत्रो का जाप कर उन पर सिद्धियां प्राप्त करते हैं।

माहवारी काल के दौरान कामाख्या देवी की पूजा करना स्त्रीत्व की आराधना करने जैसा ही है। हर युग में स्त्री का अपमान होता रहा है। भले ही आज वो कंधे से कंधा मिला कर समाज में चल रही हो लेकिन लोगों की उसे रजोधर्म को लेकर आज भी कई जगहों पर वैसी ही है। हम देवी को इन दिनों में पवित्र मान लेते हैं और एक स्त्री को अपवित्रता का दर्जा क्यों दिया जाता है।

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