Tourist Places in South India: भव्य वास्तुकला का नायाब नमूना है Kailasanathar Temple

Tourist Places in South India: भारतवर्ष धर्म, संस्कृति से जुड़ा हुआ देश है। भारत में शायद ही कोई ऐसी जगह हो जहां मंदिर न बना हो। यहां के हर मंदिर की अपनी अलग ही विशेषता है। ज्यादतर भारत के दक्षिण में बने मंदिर बहुत ही प्रसिद्ध हैं। कुछ मंदिर अपनी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है, तो कुछ अपनी सुंदरता के लिए जाने जाते हैं।

अगर हम भारत में Tourist Places in South India ढूंढे तो ज्यादतर जगहों में मंदिर ही दिखाई देंगें। दक्षिण भारत के मंदिरों की ख़ास बात यह है कि ये सभी मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए जाने जाते हैं। आज हम जिस मंदिर के बारे में आपको बताने जा रहे हैं उस मंदिर का नाम है, कैलाशनाथ मंदिर (Kailasanathar Temple), यह विशाल मंदिर  दक्षिण भारत के तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है और इस मंदिर को बहुत ही प्राचीन मंदिर माना जाता है, जो सालों से जो का त्यों बना हुआ है। यह मंदिर देखने में बेहद ही खूबसूरत है।

पहला ‘ढांचागत मंदिर’

इसका निर्माण 640 से 730 ईस्वी में पल्लव वंश के शासन काल में हुआ था। इस मंदिर के निर्माण के बारे में कहा जाता है कि यह मंदिर राजा राजसिम्हा ने बनवाया था, जब उनकी पत्नी ने अपने पति से इस मंदिर को बनवाने का आग्रह किया था। राजा राजसिम्हा के मंदिर निर्माण के बाद उनके पुत्र महेन्द्र वर्मन तृतीय ने मंदिर के बाहर सुंदर नकाशी का कार्य करवाया। जिसकी सुंदरता देखते ही बनती है।

यह एक ऐसा इकलौता मंदिर था, जो पत्थरों पर नक्काशी करके बनाया गया था।  इससे पहले तो मंदिर लकड़ी या सिर्फ चट्टानों की ही बने होते थे। इसलिए इस कैलाशनाथ मंदिर (Kailasanathar Temple) को ढांचागत मंदिर भी कहते हैं।

Kailasanathar first Temple

कैलाशनाथ मंदिर (Kailasanathar Temple) की वास्तुकला

भारत की सबसे बेहतरीन वास्तुकला का नमूना Kailasanathar Temple को ही माना जाता है। इस मंदिर का डिजाइन पूरी तरह से प्राचीन ‘द्रविड़ स्थापत्य शैली‘ पर आधारित है। दूसरी ओर इस मंदिर की नींव को बनाने के लिए ग्रेनाइट पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। आज भी यह मंदिर उतना ही सुंदर और चमकदार पत्थरों से चमकीला दिखाई पड़ता है। मंदिर के बाहर बलुआ पत्थरों से बनी मूर्तियां बेहद ही विशाल और कला का नायाब नमूना पेश करती हैं।

इसके अलावा पार्वती और शिव की नृत्य प्रतियोगिता को भी चित्रों के माध्यम दीवार पर नक्काशी करके दिखाया गया है।इसके अलावा हैरान करने वाली बात यह भी है कि इस मंदिर के आस पास लगभग 50 ऐसे छोटे-छोटे मंदिर है, जिसमें विभिन्न देवी देवताओं की मुर्तिया है। इस मंदिर में मौजूद गर्भ गृह में एक गुफा है, जिसके बारे में मान्यता है कि यदि किसी ने गृभ गुफा को पार कर लिया तो उसे सीधे बैकुंठ की प्राप्ति होती है।

kanchi puram

कांचीपुरम महोत्सव

शिवरात्रि पर  काफी भीड़ होती है। जिसका कारण है यहां हर शिवरात्रि पर लगने वाला कांचीपुरम का मेला, जो की बहुत ही बड़े महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस  मौके पर इस मंदिर की शोभा देखने लायक होती है। इस महोत्सव का आयोजन हर साल फरवरी और मार्च में किया जाता है।

अपनी बहुत सी खूबियों की वजह से ही यह मंदिर सालों से लोगों का ध्यान अपनी और आकर्षित कर रहा है। अपनी मंदिर की सुंदरता के कारण ही यह मंदिर पुरे भारतवर्ष में प्रसिद्ध है और हजारों की संख्या में लोग इस मंदिर की सुंदरता को निहारने यहां आते हैं।

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