लौह पुरुष और एकता की पहचान: Statue of Unity

Statue of Unity सरदार वल्लभभाई पटेल (1875-1950) की प्रतिमा है, जो भारतीय राज्य गुजरात में सरदार सरोवर बांध का सामना करने वाले एक द्वीप पर स्थित है। यह एकता और शांति का प्रतीक है। यह भारत के पहले उप प्रधान मंत्री और एक श्रद्धेय स्वतंत्रता सेनानी सरदार पटेल के योगदान को मनाने के लिए बनाया गया है। हाल ही में 31 अक्टूबर 2018 को उद्घाटन किया गया, यह मूर्ति एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया है।

स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की शुरुआत

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल की एक विशाल प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखा था। उन्होंने स्वयं ही 7 अक्टूबर 2010 को इस परियोजना पर कार्य करने की घोषणा की। इस परियोजना का नाम “राष्ट्र को गुजरात की श्रद्धांजलि” रखा गया। इस योजना ने जनता के साथ-साथ कई प्रमुख राजनीतिक नेताओं से समर्थन प्राप्त किया। हालाँकि, इलाके में रहने वाले आदिवासी और किसानों ने मोदी सरकार के इस फैसले का विरोध किया।

उन्होंने विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, जो विपक्षी दलों के राजनीतिज्ञों द्वारा समर्थित थे। आलोचना और विरोध के बावजूद, इस प्रतिमा का निर्माण आखिरकार 2014 में शुरू हुआ। इस कार्य को पूरा करने के लिए कई वास्तुकारों और मजदूरों को लगाया गया था। मूर्ति का निर्माण आखिरकार 2018 में पूरा हुआ। इसका उद्घाटन उसी साल 31 अक्टूबर को पीएम मोदी ने किया था।

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रन फॉर यूनिटी

Statue of Unity परियोजना के समर्थन के लिए “रन फॉर यूनिटी ’नाम से एक मैराथन 15 दिसंबर 2013 को सूरत में आयोजित की गई थी। तब से, यह प्रत्येक वर्ष 31 अक्टूबर को आयोजित किया जाता है और सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। 31 अक्टूबर 2018 को जब गुजरात में सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण किया गया, तो राष्ट्रीय राजधानी में रन फॉर यूनिटी का आयोजन किया गया। केंद्रीय युवा मामलों के मंत्री और गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाई। मैराथन में लगभग 12,000 लोगों ने भाग लिया था।

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी: एक लोकप्रिय पर्यटक आकर्षण

सरदार पटेल की 143 वीं जयंती पर स्थापित की गई Statue of Unity ने अपार लोकप्रियता अर्जित की है। यह 1 नवंबर से जनता के लिए खोला गया था और तब से यहां पर्यटकों की भरी मात्रा में भीड़ देखने को मिलती है। इस वास्तुशिल्प चमत्कार को देखने के लिए दुनिया भर से लोग इस स्थान पर आते हैं। यह पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन गया है। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या से लगाया जा सकता है।

इसके उद्घाटन के 11 दिनों के भीतर ही इसे देखने आने वाले लोगों ने डेढ़ लाख का आंकड़ा पार कर लिया था। मोदी ने कल्पना की थी कि प्रतिमा के निर्माण से राज्य के पर्यटन को बढ़ाने में मदद मिलेगी, जो वहां रहने वाले लोगों के लिए फायदेमंद होगा और ठीक वैसा ही हुआ, जैसा उन्होंने सोचा था। भारत के ही नहीं बल्कि विदेशों के लोग भी इस विशाल प्रतिमा को देखने के लिए आते हैं। 

अगर आप भी यहां आने का मन बना रहे हैं या भविष्य में कभी यहां आने का सोचते हैं तो याद रखिएगा कि यह स्मारक सोमवार को आगंतुकों के लिए बंद रहता है।

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