दिल्ली की शान – हजरत निजामुद्दीन दरगाह

Hazrat Nizamuddin Dargah भारत देश को तीर्थो का देश कहा जाता है। भारत के कोने कोने में न जाने ही कितने तीर्थ स्थल आपको देखने को मिल जाएंगें, और इन स्थलों पर लगभग हर जाती और धर्म के लोग पूरी आस्था के साथ आते हैं। आज हम जिस तीर्थ स्थल के बारें में आपको बताने जा रहें हैं उसका नाम है हजरत निजामुद्दीन दरगाह। यह सूफी दरगाह भारत की राजधानी दिल्ली मैं हैं। हर रोज प्रत्येक धर्म के न जाने कितने ही लोग अपनी मन्नतें मांगने यहां आते हैं। इस दरगाह की खास बात यह है कि आज तक कोई भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटा। कहते हैं यहां मांगने वाली की हर
मुराद कबूल की जाती है।

हजरत निजामुद्दीन दरगाह का इतिहास:

यह दरगाह दक्षिण दिल्ली में स्थित है, जिसे हजरत निज़ामुद्दीन औलिया की याद में बनाया गया था। वो चिश्ती घराने के चौथे संत थे, जिन्होंने वैराग्य और सहनशीलता की विशाल मिसाल पेश की थी। ऐसा भी कहा जाता है कि १३०३ में इनके खाने पर मुग़ल सेना ने हमला भी रोक दिया था, जिसके कारण सभी धर्मों के लोगों के दिलों में इनकी एक विशेष पहचान बन गई। इनकी मृत्यु ९२ साल की उम्र में हुई थी। उनकी मृत्यु के पश्चात ही उनके मकबरे का निर्माण शुरू किया गया लकिन इसका नवीनीकरण 1562 तक जारी रहा।

दरगाह की संरचना:

इंसानियत, भाईचारे और प्यार की सीख देती ये दरगाह इस्लामिक वास्तुशैली बहुत होइ शानदार नमूना प्रस्तुत करती है। दरगाह के अंदर यह संगमरमर से बना एक मकबरा है। इसके साथ ही यहां शायर अमीर खुसरो और मुगल राजकुमारी जहां आरा बेगम के भी मकबरे हैं।
सभी मन्नतें होती हैं पूरी: दरगाह के चारों तरफ जालियां बनी हुई है। ऐसा माना जाता है जो यहां इन जालियों में धागे बाँधने से सभी की मन्नतें पूरी हो जाती हैं। यहां आने के बाद कोई भी खाली हाथ नहीं लौटता। यहां हर व्यक्ति की फ़रियाद सुनी जाती हैं।

दरगाह में आने से पहले कंधें और सर ढक कर आना जरुरी होता है। वीरवार और विशेष अवसरों पर आपको यहां अत्यधिक भीड़ देखने को मिल जाएगी थान उस दिन यहां धार्मिक गायन और संगीत का भी आयोजन किया जाता है।
हजरत निजामुद्दीन दरगाह को दिल्ली की शान माना जाता है। इसके बिना दिल्ली अधूरी है। यदि आप कभी दिल्ली आएं या घूमने का मन बना रहें है तो एक बार दरगाह पर जरूर जाएं। ये आपके घूमने के अनुभव में सबसे सर्वोपरि साबित होगा।

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