Best Place to Visit in Uttarakhand: आस्था का देवआलय है मां गरजिया देवी का मंदिर

Best Place to Visit in Uttarakhand: लोग अक्सर आश्चर्य करते हैं, मुझे मंदिरों में क्यों जाना चाहिए? ‘देवालय (मंदिर) भगवान का एक वास है, जिसका अर्थ है, भगवान का वास्तविक अस्तित्व। ‘मंदिर जाने से हमारी इच्छाएं भगवान द्वारा स्वीकार की जाती हैं और हम मानसिक शांति का अनुभव करते हैं इस विश्वास के साथ भक्त मंदिर जाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि भगवान भाव (आध्यात्मिक भावना) के लिए तरसते हैं।

मंदिर एक प्रतीकात्मक घर और भगवान का शरीर माना जाता है। यह हिंदू धर्म के विचारों और मान्यताओं को व्यक्त करने के लिए प्रतीकवाद का उपयोग करते हुए मानव और देवताओं को एक साथ लाने के लिए बनाया गया है। एक हिंदू मंदिर का प्रतीक और संरचना वैदिक परंपराओं में निहित है, जो मंडलियों और चौकों को तैनात करते हैं। मंदिर हिंदू ब्रह्मांड के सभी तत्वों को शामिल करता है – अच्छे, बुरे और मानव को प्रस्तुत करने के साथ-साथ चक्रीय समय और जीवन के हिंदू अर्थ के तत्व- प्रतीकात्मक रूप से धर्म, कर्म, अर्थ, मोक्ष और कर्म को प्रस्तुत करते हैं।

Garjiya Devi Templ

Garjiya Devi Temple भारत के प्राचीन देवी मंदिरों में से एक है, जो उत्तराखंड के रामनगर के पास गिरजिया नामक एक सुंदर गाँव के बाहरी इलाके में स्थित है। Garjiya Devi Temple को रामनगर में गिरिजा देवी मंदिर भी कहा जाता है। (जिसका नामकरण तत्कालीन देवता गरजिया देवी के नाम पर किया गया है), कोसी नदी में एक विशाल चट्टान पर स्थित सुंदर दृश्य को देखते हुए। नैनीताल में एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है और Garjiya Devi Temple उत्तराखंड में हर साल हजारों भक्तों को आकर्षित करता है क्योंकि देवता को उस स्थान की पेशकश करनी पड़ती है। जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, रामनगर उत्तराखंड के पास स्थित, गर्जिया देवी मंदिर में कार्तिक पूर्णिमा के समय बड़ी विशाल भीड़ देखने को मिलती है। कार्तिक पूर्णिमा रोशनी का त्योहार है।

त्योहार के समय भक्तों और उपासकों द्वारा जलाए गए दीपकों से पूरी तरह सजा हुआ Garjiya Devi Temple कोसी नदी पर एक अद्भुत मनोरम दृश्य उजागर करता है जो कि बहुत ही मनमोहन होता है। देवी गिरिजा जो गिरिराज हिमालय की पुत्री और संसार के पालनहार भगवान शंकर की युक्तिगिनी हैं, कोसी (कौशिकी) नदी के मध्य एक टीले पर बने मंदिर में वास करती हैं।

कुछ वर्ष पूर्व इस मन्दिर के विषय में कम ही लोगों को ज्ञात था, वर्तमान में गिरिजा माता की कृपा से अनुकम्पित भक्तों की संख्या लाखों में पहुंच गई है। इस मंदिर के विषय में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने के लिए इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक पृष्ठभूमि को भी जानना आवश्यक है।

भगवान शिव की अर्धांगिनि मां पार्वती का एक नाम गिरिजा भी है, इस मन्दिर में मां गिरिजा देवी सतोगुणी रुप में विद्यमान है। जो सच्ची श्रद्धा से ही प्रसन्न हो जाती हैं, यहां पर नारियल, लाल वस्त्र, सिन्दूर, धूप, दीप आदि चढ़ा कर वन्दना की जाती है। मनोकामना पूर्ण होने पर श्रद्धालु घण्टी या छत्र चढ़ाते हैं। नव विवाहित स्त्रियां यहां पर आकर अटल सुहाग की कामना करती हैं। निःसंतान दंपत्ति संतान प्राप्ति के लिये माता के चरणों में झोली फैलाते हैं।

वर्तमान में इस मंदिर में गिरिजा माता की बहुत ही ऊंची मूर्ति स्थापित है, इसके साथ ही सरस्वती, गणेश जी तथा बटुक भैरव की संगमरमर की मूर्तियां मुख्य मूर्ति भी साथ में स्थापित हैं। इसी परिसर में एक लक्ष्मी नारायण मंदिर भी स्थापित है, इस मंदिर में स्थापित मूर्ति यहीं पर हुई खुदाई के दौरान मिली थी।

 Garjiya

पूजा के विधान के अनुसार जो भक्त पूजा करने के लिए मंदिर आते है वो सभी पूजा करने के पश्चात बाबा भैरव (जो माता के मूल में संस्थित है) वहां जरूर जाते हैं और जहाँ वो बाबा भैरव पर चावल, मास और उड़द की दाल चढ़ाकर पूजा-अर्चना करते हैं। ऐसा भी कहा जाता है कि भैरव की पूजा के बाद ही मां गिरिजा देवी की पूजा का सम्पूर्ण फल प्राप्त होता है।

अगर आप भी हमारी तरह Best Place to Visit in Uttarakhand ढूंढ रहे हैं, तो यह मंदिर आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकता है। जहाँ आप शांति के साथ साथ भक्ति भी प्राप्त करते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *