Child labour in india: और उस नन्हे के हाथों से बचपन छूट गया

Child labour in india: खेलने का समय खत्म हो गया है, जाओ जाकर कुछ काम करो। छोटा बच्चा खड़ा हुआ और रसोई में वापस आकर चाय की एक ट्रे ली और ग्राहक के पास गया।

सर, आपकी चाय!

रख दो और जाकर जल्दी हमारे लिए परांठे भी भिजवा दो।

मैं वहां कड़ी सब देख रही थी। बच्चा जो महज 10 से 12

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का रहा होगा, वो मुस्कुराया और जी, अभी लाया कहकर वहां से तेजी से दौड़ा। उसकी आँखों में मानों तेज था, कुछ करने का वो जज्बा था, जो शायद कोई आम व्यक्ति ना देख पाता, उसे ये फ़िक्र नहीं थी कि कोई उससे प्यार से बात कर रहा है या नहीं, उसे बस अपने काम से मतलब था, जिसे वो ख़ुशी-खुशी कर रहा था। मैंने मालिक को देखा और नमस्कार किया और पूछा। इतना छोटा बच्चा इसके माँ बाप सब कहाँ हैं? पढ़ने की उम्र में आप इस से काम करवा रहे हैं।

काम नहीं करेगा तो खाएगा क्या? इसका निकम्मा बाप तो शायद इन्हें भूखे पेट सुला दे। यहां कम से कम मेहनत करके पैसा कमाना तो सीखेगा और की तरह भीख तो नहीं मांगता। मैं उस से जितना बन पड़ता है काम करवाता हूँ, समय मिलता है, तो वो खेलता भी है और पढता भी है। कुछ सालों में जिम्मेदार हो जाएगा, बाहर गलत शिक्षा हासिल करने से पहले दुनियादारी सीखनी भी जरुरी है।

मैं बहुत देर इस पर सोचती रही और अंत में यही लगा कि Child labour in india की समस्या आज से नहीं कई सालों से बनी हुई है। बहुत से लोग अपने बच्चों को स्कूल भेजने में मजबूर हैं। आज भले ही शिक्षा के स्तर बढ़ चुके हैं, सरकार की बहुत सी सुविधाएं हैं, लेकिन मज़बूरी इंसान से बहुत कुछ करवाती है और शायद जीवन की सबसे बड़ी सीख भी सिखाती है। 

इस दुनिया में बहुत सारे खुश किस्मत लोग है और अपने जीवन में काफी खुश भी हैं। बहुत से दुखी लोग भी हैं, क्योंकि उनके जीवन में बहुत सारी समस्याएं हैं। लेकिन मन की शान्ति केवल उन्हें हैं, जो जीवन के हर पहलू को ख़ुशी से जीता है। जैसे कि वो छोटा बच्चा।

Child labour in india की समस्या बहुत समस्याग्रस्त है। अगर हम वर्ष 2011 के आंकड़ें देखें तो पाएंगें कि पुरे भारत में 33 मिलियन बाल श्रमिक हैं। आंकड़ों के अनुसार ये सभी बाल श्रमिक 5 से 18 वर्ष की आयु के हैं जिसमें से 10 मिलियन से अधिक बाल मजदूर की आयु 5 से 14 वर्ष हैं।

इन आंकड़ों पर गौर किया जाए तो स्तिथि बेहद ही गंभीर है और इस दुखद तथ्य के पीछे का सत्य गरीबी और दूसरे पर निर्भरता है। हालांकि बंधुआ मजदूरी को श्रम प्रणाली अभियोजन अधिनियम 1976 के तहत बंद किया गया था लेकिन आज भी भारत के कई क्षेत्रों में यह काम होता आया है। भले ही ब्रिटिश शासन के बाद इस पर रोक लगा दी गई हो लेकिन फिर भी यह काम चल रहा है। एक घटना के अनुसार 1996 में तमिलनाडु में एक आश्चर्यजनक छापेमारी की गई। यहां खबरों में पाया गया कि छापेमारी में 53 बंधुआ बाल श्रमिक पाए गए।

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इन सब के पीछे की स्तिथि है भारत में गरीबी और निम्न जीवन स्तर। हम ऐसा मानते हैं कि बच्चा काम की तुलना में स्कूल में ज्यादा सही रहते हैं, इतनी छोटी उम्र में उनसे काम करवाना केवल उनके बचपन को ही नहीं छीन रहा बल्कि उनके मानसिक आघात पहुंचा रहा है। भले ही वो मजदूरी करे लेकिन काम के घंटे उतने ही रखे जाते हैं। कारखाने, ढाबे और फैक्ट्री में आप इन्हें अक्सर पूरा दिन काम करते पाएंगें। काम के घंटे भले ही 8 घंटे तय किए गए हैं, लेकिन वो उन्हें आज वही 8 घंटे से ज्यादा काम करने के लिए बाध्य करते हैं। इसके बावजूद भी मजदूरी का भुगतान उतना नहीं है, जितना की होना चाहिए।

2016 की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने श्रम कानूनों में कुछ एक संशोधन किए थे।  जिसमें यह तय किया गया था कि 14 साल से कम उम्र के बच्चों को पारिवारिक व्यवसाय और मनोरंजन के क्षेत्रों में काम करने की अनुमति है। लेकिन ऐसा संशोधन नहीं किया गया कि वो ऐसे काम करें जहाँ उन्हें जान का जोखिम हो। 

Child labour in india की समस्या से जूझने वाले राज्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, बिहार, उत्तर प्रदेश और राजस्थान हैं। पूरे देश भर की जनसख्या के अनुसार 40 प्रतिशत से भी अधिक बाल शर्म इन्हीं राज्यों में पाए गए हैं। यहां बच्चे चमड़े, जरी और होटल उद्योगों जैसे क्षेत्रों में आज भी अपनी क्षमता से ज्यादा की मजदूरी कर रहे हैं।

भारत में सबसे अधिक बच्चे ग्रामीण आधार पर काम करते हैं। न जाने कितने ही सैंकड़ों बच्चे कृषि पद्धतियों में कार्यरत हैं, क्योंकि इसमें कम कौशल और उच्च प्रभाव वाला श्रम की आवश्यकता होती है। उसके बाद भी भारत में ये सभी बच्चे कुपोषण का शिकार हैं।

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यहां मुद्दा यह नहीं है कि आप बच्चे को मजदूरी पर रखे हुए हैं, ये मुदा तो बहुत पहले था और आज भी है। लेकिन लड़ाई उनके अधिकारों की है। काम के घंटों के हिसाब से तय की गई मजदूरी भी न मिले तो एक और बड़ी समस्या सामने आती है और साथ ही बच्चों से कई घंटों तक लगातार काम करवाना भी एक बड़ा अपराध है। जिसमें बहुत से बाल मजदूरी करवाने वाले मालिक शामिल हैं।

सरकार ने आज भले ही Child labour in india को रोकने के लिए कई नई मुहीम चलाई हों, लेकिन साल में बाल श्रम को 2 प्रतिशत तक कम करने की प्रक्रिया बहुत ही  धीमी है।

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