Buddha Purnima 2019: किसलिए मनाई जाती हैं Buddha Purnima; जानिए इसे मनाने का महत्व

वैशाख मास की पूर्णिमा को Buddha Purnima भी कहा जाता है। 563 ईसा पूर्व ठीक इसी दिन बौद्ध धर्म के संस्थापक भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। भगवान् बुद्ध के जन्म को इस दिन लोग Buddha Purnima के रूप में मनाते हैं। बौद्ध धर्म के लोगों के साथ साथ हिन्दू लोग भी इस दिन को मनाते हैं, क्योंकि भगवान बुद्ध और कोई नहीं बल्कि विष्णु जी के अवतार हैं। जिनका जन्म पाप, हिंसा, बुराइयां खत्म करने के लिए हुआ था।

भगवान बुद्ध ने जीवन की सब मोह माया को त्याग दिया और अपने गृहस्त जीवन से मुक्ती लेकर वो जीवन के इस कठोर सच की तलाश में निकल पड़े। लाखों साल भगवान् बुद्ध ने बोधगया में एक बोधि नामक वृक्ष के नीचे कठोर तपस्या की। तब जाकर उन्हें सत्य का आभास हुआ और ज्ञान की प्राप्ती हुई। फिर उस दिन के बाद से तो लोगों ने बुद्ध को एक भगवान के रूप में स्वीकार कर लिया। काफी लोग उनके भक्त और अनुयायी बन गए।

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Buddha Purnima कैसे मनाई जाती है

बौद्ध धर्म के लोगों के लिए ये उनका सबसे बड़ा वार्षिक त्यौहार होता है। बौद्ध धर्म के लोग अलग अलग देश में बसे हुए हैं और सभी के इस त्यौहार को मनाने के रीति-रिवाज़ अलग अलग हैं। कई जगहों पर इस दिन लोग अपने घरों और मंदिरों में अगरबत्ती और दीपक जलाते हैं। उसके बाद भगवान् की पूजा कर फलों का प्रसाद देते हैं। इस दिन प्रात: काल से ही मंदिरों में भगवान् बुद्ध का पाठ निरंतर चलता रहता है। कुछ जगहों पर तो लोग बौध वृक्ष की पूजा करके उस पर दूध भी चढ़ाते हैं।

Buddha Purnima में क्या है ख़ास

इस दिन को बहुत ही शुभ माना जाता है। कोई व्यक्ति यदि नया काम शुरू करना चाहे तो यह दिन उसके लिए काफी शुभ है। इस दिन पिंजरे में बंद पक्षियों को आज़ाद करने की परंपरा भी है। साथ ही इस दिन गरीबों में कपड़े बांटे जाते हैं और उन्हें खाना खिलाया जाता है। इस दिन तीर्थ स्थानों पर गंगा स्नान करने का भी बड़ा महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि इस दिन गंगा स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है।

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