सफलता की भूख है तो “सुपर 30” में हो जाओ शामिल

Super 30 movie review in hindi: रविन्दरनाथ टैगोर ने सही कहा था ‘एक्लो चलो रे”, अगर आपको कुछ करना है तो उस रास्ते पर आपको अकेले चलना होगा। भीड़ में पहचान बनानी हो तो, उस भीड़ से निकल कर  एक अलग दुनिया बना लो और फिर आप उस भीड़ में सबसे अलग दिखोगे। जिस तरह से गणित के विशेषज्ञ आनंद कुमार के ये सुपर 30 अलग दिखते हैं। जिनकी आँखों में सपने तो थे, लेकिन साधन नहीं और इन डूबता हुए सपनों को जब कोई सहारा मिल जाता है, तो ये वो कमाल कर देते हैं कि भीड़ में अलग नजर आते हैं।

साधारण से दिखने वाले गणित के विशेषज्ञ और शिक्षक आनंद कुमार की कहानी सुपर ३० उसके व्यतीत किए हुए उल्लेखनीय जीवन को दर्शाती है। एक ऐसा व्यक्ति जो भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान की प्रवेश परीक्षाओं में किसी कारण से वंचित रह जाने वाले बच्चों को कोचिंग देता है। लेकिन केवल उन्हें जिनमें शिक्षा पाने की लगन होती है। आनंद कुमार की कहानी ध्यान देने योग्य है, इस फिल्म के जरिए दिए गए सन्देश पर गंभीर सोच का प्र्शन अंकित होता है। निर्देशक विकास बहल ने उसे फिल्म में दर्शाने का हर सफल प्रयास किया है और वो इस काम के काफी हद तक सफल भी हुए हैं। 

फिल्म की कहानी आनंद कुमार पर आधारित है। 

Super 30 फिल्म की कहानी आनंद कुमार की कहानी है। जो पटना शहर में रहता है।  आनंद कुमार एक ऐसा व्यक्ति है, जो काफी मेहनती लड़का है और अपनी बुद्धिमता एवं कड़ी मेहनत के दम पर कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहता है

वो इस काम में सफल भी हो जाता है। लेकिन आनंद कुमार वहां टूट जाता है जब कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से उसे बुलावा आता है और घर की गरीबी के कारण वो वहां जा नहीं पाता। आनंद के पिता एक डाकिया हैं, जिन्हें २ समय की रोटी के लिए भी कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। इधर आनंद की प्रेमिका रितु (मृणाल ठाकुर) भी उसका साथ छोड़ देती है। एक दिन आनंद कुमार की भेंट लल्लन जी (आदित्य श्रीवास्तव) से होती है, जो एक कोचिंग चलाता है।

आनंद सेंटर पर क्लासेज देना शुरू करता है। कुछ ही दिनों में आनंद कुमार की गरीबी में सुधार हो जाता है। लेकिन एक दिन उसे इस बात का अहसास होता है कि कुछ सही नहीं है। वो स्वयं ही राजा के बच्चों को राजा बनाने में लगा हुआ है। बाकी एक गरीब का बच्चा तो फिर से गरीब ही रह गया। ये समझने के बाद वो फैसला लेता है कि अब राजा का बेटा राजा नहीं बनेगा। इसके लिए वो सुपर 30 की शुरुआत करता है, और उन बच्चो को मुफ्त आईआईटी की कोचिंग देता है, जिनके पास हुनर तो है लेकिन पैसो की कमी है। इस लंबी लड़ाई में आनंद के जीवन में काफी संघर्ष है। जिसमें उसका भाई उसकी मदद करता है। 

Super 30 movie review in hindi:

फिल्म का पहला भाग शानदार है। लेकिन दूसरे भाग में कहानी थोड़ी खींच जाती है। लेकिन इसके बाद भी फिल्म आपको कहानी से जुड़े रहने के लिए बांधे रखती है। ऋतिक रोशन आनंद कुमार की भूमिका में काफी फिट बैठते हैं। उनकी बोली, उनका व्यवहार आनंद से काफी मेल खाता प्रतीत होता है।

ऐसा लगता है कि उन्होंने आनंद के किरदार को काफी अच्छे से पढ़ा और समझा है। मृणाल ठाकुर की फिल्म में बहुत कम भूमिका है, लेकिन जितना भी उन्हें स्पेस मिला है, वो उसमें जंची हैं। पंकज त्रिपाठी की एक्टिंग तो हमेशा से ही दमदार होती है। इस फिल्म में भी शिक्षा मंत्री का रोल उन्होंने अच्छे से निभाया है।

हालांकि फिल्म में असल जिंदगी वाले आनंद कुमार पर लगे आरोपों के बारे में कोई जिक्र नहीं किया गया। इसके बाद भी फिल्म काफी प्रेणादायक है। इसमें मस्ती है, मजाक है और साथ ही इमोशनल ड्रामा भी है। कुल मिलकर फिल्म काफी अच्छी है आप को यह फिल्म अपने बच्चों के साथ जरूर देखनी चाहिए। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *